समय में यात्रा कैसे करें

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यदि आप को कभी समय के साथ यात्रा यानी Time Travel का मौक़ा मिले तो आप क्या करेंगे? हो सकता है आप प्राचीन मिस्र से जाना चाहे जहाँ पर pharaoh रहते थे, या फिर हो सकता है कि आप रामायण या महाभारत काल में जाना चाहे, या आप अपने भविष्य में जाना चाहे या और भी बहुत से ऐसे काम है जो आपके दिमाग़ में, आपके भूतकाल और भविष्य काल से सम्बंधित हो, आ सकते हैं. तो सबसे पहले अलबर्ट आइंस्टाइन में हमें इस बारे में बताया कि समय में यात्रा करना कोई वैज्ञानिक कथा नहीं है, बल्कि ऐसा संभव है. आधुनिक फिजिक्स के जनक में से एक कहलाने वाले एल्बर्ट आइन्स्टाइन बताते हैं कि समय यात्रा की संभावना हमारी पहुँच के भीतर है.

लेकिन हमारा सवाल यह है कि क्या वास्तव में समय में यात्रा करने के लिए टाइम मशीन बनाने की आवश्यकता है, यह हमारी प्रकृति ने इससे पहले से ही हमारे लिए बना रखा है?

बात करते हैं जून 1951 की.

न्यूयॉर्क में हंगामा मच जाता है जब एक आदमी सड़क पर भाग रहा होता है और गाड़ी की टक्कर से वहीं पर मर जाता है. वहाँ बहुत से भीड़ इकट्ठा हो जाती है और उसी समय हैं यह भी स्पष्ट हो जाता है कि इस व्यक्ति में कुछ तो अजीब था. पीड़ित एक युवक था जिसने 1870 के दशक के कपड़े पहने हुए थे. पुलिस के लिए यह रहस्य और गहरा गया जब पुलिस ने उस युवक की तलाशी ली और उसकी जेब में ऐसा कुछ ख़ास नहीं मिला लेकिन जो भी मिला वह काफ़ी पुराना था और बहुत ही अच्छी अवस्था में था. पांच सेंट की कीमत वाला एक बीयर टोकन, 1876 का एक पत्र, और बैंक नोटों में $70 जो अब उपयोग में नहीं लिए जाते थे। लेकिन उन्हें जो सबसे बड़ा सुराग मिला, वह रूडोल्फ फेंटेज़ नाम का एक बिजनेस कार्ड था। मामले के प्रभारी अधिकारी हर न्यूयॉर्क रिकॉर्ड के माध्यम से नाम की तलाश कर रहे थे। इस तरह उन्हें पता चला कि इस सवाल के जवाब ने रहस्य को और गहरा कर दिया था। न्यूयॉर्क में इस नाम के तहत पंजीकृत एकमात्र व्यक्ति 1876 में लापता हो गया था, और यह मामला कभी हल नहीं हुआ।

युवा रूडोल्फ फेंट्ज़ ने भविष्य में 75 साल की यात्रा की और अपने भाग्य को भविष्य में देखा, और वह भी उससे बहुत अलग अवधि में। लेकिन प्रश्न ये उठता है कि क्या समय यात्रा का रहस्य उसके साथ मर गया?

तो इस रहस्य को सुलझाने के लिए क्या पुलिस वालों ने टाइम मशीन ढूंढने की कोशिश नहीं की है, उसे वही न्यूयॉर्क में कहीं होना चाहिए था. लेकिन जब बहुत से लोग कहते हैं कि टाइम मशीन में एक मशीन है और मानव के द्वारा बनायी हुई है तो इसी के साथ बहुत से लोग यह भी कहते हैं की टाइम मशीन मानव निर्मित नहीं है. ख़ासकर बहुत से TV शो और फ़िल्मों में तो यही बताया गया है कि टाइम मशीन मानव निर्मित है. लेकिन जितनी भी वैज्ञानिक खोज हुई है वह यह कहती हैं कि टाइम मशीन का निर्माण प्रकृति के द्वारा हुआ है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पेड़ों पर टाइम मशीन उगती है.

टाइम मशीन को समझने से पहले आपको यह समझना होगा कि आपके लिए समय क्या है? वास्तव में समय आपकी घड़ी के अंदर है या फिर घंटे और मिनट की सुईया समय नहीं है केवल समय बताने का एक तरीक़ा है. लेकिन समय बताने का यह तरीक़ा केवल हमारे पृथ्वी ग्रह के लिए ही वैध है क्योंकि मंगल ग्रह पर समय अलग तरह से चलता है.

मंगल ग्रह पर एक दिन 24 घंटे और 37 मिनट का होता है. पृथ्वी पर अधिकतर लोग मानते हैं कि एक दिन में 24 घंटे होते हैं लेकिन यहाँ वे गलती करते हैं. वास्तव में पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के लिए 23 घंटे और 56 मिनट का समय लेती है. और जब हम वर्षों के बारे में सोचते हैं तो समय में और भी अंतर होता है. मंगल ग्रह सूर्य की परिक्रमा करने में 687 दिन लेता है. यह लगभग पृथ्वी के दो वर्षों के बराबर है. लेकिन ये संख्याएँ केवल समय को नापने के तरीक़े हैं. लेकिन अगर नापने के तरीक़े न होते तो भी यह स्थान मौजूद होते. समय इसी तरह से काम करता है. लेकिन मंगल ग्रह पर समय पृथ्वी ग्रह की तुलना में अलग तरह से गुज़रता है. वहाँ समय पृथ्वी के मुक़ाबले तेज़ी से गुज़रता है. और हम एक सकती घड़ी का उपयोग करके यहाँ पृथ्वी पर इसे साबित कर सकते हैं. ऐसे ही एक घड़ी ब्राज़ील में है, जो कि साओ पालो विश्वविद्यालय में है.

यह स्थान दक्षिणी गोलार्ध के कुछ स्थानों में से एक जहाँ परमाणु घड़ियों का उत्पादन होता है। परमाणु घड़ियाँ अत्यंत सटीक होती हैं क्योंकि वे परमाणुओं के व्यवहार के अनुसार सेट की जाती हैं, जैसे कि सीज़ियम-133, जो इस निर्वात कक्ष में है। एक बार माइक्रोवेव के संपर्क में आने के बाद, ये आइटम तेजी से कंपन करते हैं, प्रति सेकंड 9 बिलियन से अधिक बार। चूंकि परमाणु घड़ियाँ इनमें से प्रत्येक कंपन को पंजीकृत करती हैं, इसलिए वे एक एकल सेकंड को 9 बिलियन भागों में तोड़ सकती हैं। परमाणु घड़ियां हमेशा एक ही दोलन का जवाब देते हैं, हमेशा एक ही तरह से कंपन करती है, यह प्रति सेकंड 9 बिलियन से अधिक होता है, यह सटीकता जबरदस्त है। एक नियमित घड़ी प्रति दिन एक सेकंड आगे या पीछे हो सकती है। लेकिन एक परमाणु घड़ी को ऐसा करने में 1 मिलियन साल लगेंगे। इसलिए वे यह साबित करने के लिए आदर्श हैं कि समय यात्रा वास्तविक है। इस तथ्य को कुछ वैज्ञानिकों ने व्यावहारिक तरीके से प्रदर्शित किया। दो परमाणु घड़ियों को समुद्र तट पर सिंक्रनाइज़ किया गया और उनमें से एक को वहां छोड़ दिया, जबकि दूसरी को माउंट सुन्नपा के शिखर पर ले जाया गया, जो 800 मीटर से अधिक ऊंचा था। कुछ दिनों बाद, शोधकर्ताओं ने पहाड़ के ऊपर की घड़ी को समुद्र के स्तर पर रहने वाले व्यक्ति के पास दूसरी घड़ी के बगल में रख दिया। जब दोनों उपकरणों पर समय की तुलना की, तो वैज्ञानिक को कुछ आश्चर्यजनक बात का एहसास हुआ। घड़ियों को अब सिंक नहीं किया गया था।जिस घड़ी को पहाड़ से नीचे लाया गया था, वह दूसरी घड़ी से थोड़ा आगे थी जो समुद्र के स्तर पर थी। यह इस बात का सबूत था कि पर्वत पर छोड़ी गई घड़ी के लिए समय तेजी से गुजरा था। और यही एक कारण है मंगल में समय के तेज़ी से बढ़ने के लिए.

तो अगर आप समय में यात्रा करना चाहते हैं तो इसके लिए आपको उस जगह को भी समझना पड़ेगा जहाँ पर आप उस समय हैं. लेकिन मंगल में समय तेज़ी से क्यों चलता है क्योंकि मंगल ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की तुलना में कम है.

लेकिन समय के साथ गुरुत्वाकर्षण का क्या संबंध है ? हाँ ये सही है कि गुरुत्वाकर्षण का सम्बंध समय के साथ भी है और अंतरिक्ष के साथ भी. ये दोनों आपस में जुड़े हुए हैं. अंतरिक्ष में 3 आयाम हैं ऊँचाई, चौड़ाई और गहराई. लेकिन एक चीज़ है जो हम आयाम के रूप में सोचने के लिए उपयोग नहीं करते हैं और वह हैं समय. सापेक्षता कि इस सिद्धांत के अनुसार,ब्रम्हाण्डअंतरिक्ष और समय नामक एक चार आयामी ग्रिड से बना है. हमारे कई दैनिक कार्यक्रम सुनिश्चित करते हैं कि समय और स्थान एक साथ कैसे संचालित होते हैं. उदाहरण के लिए एक महिला जो एक मॉल में अपने पति से मिलने जाती है, उसे यह तो पता है कि उसका पति उस मॉल में होगा लेकिन कब यह नहीं पता. अपने पति को देखने के लिए इस महिला को मॉल में इंतज़ार करना पड़ेगा. और दूसरी तरफ़ महिला को यह पता है कि उसका पति कितने बजे आने वाला है लेकिन फिर भी वह उसे नहीं ढूंढ पाएंगे क्योंकि उसे उसकी लोकेशन नहीं पता. और इसलिए वास्तविकता में स्थान और समय साथ-साथ चलते हैं.

यह समझने के लिए कि गुरुत्वाकर्षण किस तरह से संबंधित है, हमें द्रव्यमान ( mass ) के बारे में बात करने की आवश्यकता है, जिसका आकार से कोई लेना देना नहीं है और यह बात विज्ञान साबित कर चुका है. अब तो चलिए एक संगमरमर और एक स्टायरोफोम बॉल को पानी के टैंक में डालते हैं और देखते हैं कि क्या होता है? परिणाम इतना भी आश्चर्यजनक नहीं होगा क्योंकि जो वस्तु भारी लग रही थी वह नीचे की ओर चली जाएगी. लेकिन एक सेकेंड के लिए रुकिए क्योंकि यहाँ पर एक गड़बड़ है. क्योंकि जब हम उनको एक इसके पर यह पैमाने पर रखते हैं तो हम देखते हैं कि उनके पास समान द्रव्यमान है. तो इसलिए अगर हम यह सोचे कि द्रव्यमान आकार पर निर्भर करता है तो हम ग़लत है. समान द्रव्यमान होने का मतलब समान घनत्व होना नहीं है, जो कि यह बहुत मायने रखता है. स्टायरोफोम बॉल इसलिए नहीं तैरती क्योंकि वह हल्की है बल्कि इसलिए पानी पर तैरती है क्योंकि इसका घनत्व पानी से कम है.

इन दोनों ही वस्तुओं में सामान द्रव्यमान होता है लेकिन उनके आकार भिन्न होते हैं क्योंकि वे विभिन्न घनत्व वाले पदार्थों से बने होते हैं. एक ही द्रव्यमान की धूम वस्तुओं के बीच सबसे छोटा वाला ज़्यादा सका न होगा मतलब उसका घनत्व को ज़्यादा होगा और यही नियम है दूसरी सामान वस्तुओं में भी लागू होता है. और इस तरह से यह हैं अंतरिक्ष और समय के आयामों का प्रतिनिधित्व करता है. और आप देख सकते हैं कि किस तरह से बड़ी वस्तु इन आयामों को कम विकृत करती है.

जब इसमें छोटी सघन वस्तु को डाला जाता है तो क्या होता है। सघन वस्तु एक अंतरिक्ष-समय के आयामों को को उसके चारों ओर अधिक तीव्रता से विकृत करती है। और याद रखें, यहाँ दोनों वस्तुओं के द्रव्यमान एक ही है। आइए दिखाते हैं कि यह बड़ा गोला सूर्य है, और छोटा वाला, पृथ्वी। अंतरिक्ष-समय विकृत होने से पृथ्वी प्रभावित होती है, जो सूर्य से आकर्षित होती है। अब पृथ्वी की गेंद के साथ एक और भी छोटी गेंद, चंद्रमा रखें। पृथ्वी सूर्य से बहुत छोटी है। लेकिन यह अंतरिक्ष-समय को भी विकृत करती है। निरीक्षण करें कि चंद्रमा की गेंद हमारे ग्रह से कैसे आकर्षित होती है।

पृथ्वी अंतरिक्ष समय विरूपण।

हम तो बस "गुरुत्वाकर्षण" के बारे में सोच रहे हैं, लेकिन यह वास्तव में अंतरिक्ष-समय में एक मोड़ है। गुरुत्वाकर्षण सिर्फ वह तरीका है जिससे हम विकृति (distortion) महसूस करते हैं।

लेकिन जब मैं इस ग्रेड को देखता हूं, तो मुझे केवल एक जगह दिखाई देती है। याद है कि मैंने कैसे कहा कि वे दोनों आपस में जुड़े हुए हैं? समय इस पूरे ग्रिड पर है तो आइए इसे एक चित्र की मदद से समझें। यह पैमाना समय का प्रतिनिधित्व करता है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड में मौजूद है। इस पैमाने पर हर निशान एक पल है। अब देखें कि क्या होता है जब बहुत अधिक द्रव्यमान वाली कोई वस्तु उसके पास आती है। जैसे ही समय अंतरिक्ष से जुड़ा होता है, गुरुत्वाकर्षण द्वारा विकृत हो जाता है और यही समय का फैलाव है (Time Dilation)। जिस क्षेत्र में ग्रिड बाहर तक फैला है, वहाँ समय धीमा हो जाता है। ग्रिड जितना अधिक मजबूत होता है, गुरुत्वाकर्षण भी उतना ही अधिक मजबूत होता है। दूसरे शब्दों में, समय धीमा हो जाता है। यह हमने तब देखा था जब परमाणु घड़ियों के साथ हमने प्रयोग किया था कि किस तरह परमाणु घड़ियां अलग अलग ऊँचाई पर व्यवहार करती हैं । समुद्र-तल के पास की घड़ी पृथ्वी के कोर के ज़्यादा क़रीब थी बजाय के उस घड़ी के जो पहाड़ के ऊपर थी। यही कारण है कि यह गुरुत्वाकर्षण से अधिक प्रभावित थी। इसी वजह से समुद्र के स्तर पर घड़ी के लिए समय धीमा हो गया।

ब्लैक होल एक छोटी सी जगह के भीतर भारी मात्रा में द्रव्यमान को केंद्रित करता है। ब्लैक होल का घनत्व बहुत बड़ा है, इसलिए उनका गुरुत्वाकर्षण सितारों और ग्रहों की तुलना में अधिक विशाल है। आपको यह देखना चाहिए कि ब्लैक-होल अंतरिक्ष-समय आयामों में क्या करता है। इसका फैलाव बहुत बड़ा है। क्या यह उस हालिया फिल्म से संबंधित नहीं है, जो उन अंतरिक्ष यात्रियों के साथ है जो एक ब्लैक होल के निकट आते हैं … हां इंटरस्टेलर। मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक। यह समय के फैलाव के प्रभावों को पूरी तरह से दर्शाता है।

इंटरस्टेलर।

मूवी में, अंतरिक्ष यात्री एक ग्रह पर एक ब्लैक होल की परिक्रमा कर रहे हैं। यह गुरुत्वाकर्षण इतना तीव्र है कि जहाज में रुके वैज्ञानिक के लिए दो सेकंड 20 घंटे के बराबर हैं। और अंतरिक्ष यात्रियों को होने वाले समय के फैलाव पर ध्यान नहीं जाता क्योंकि अंतरिक्ष-समय में विकृति न केवल समय को प्रभावित करती है, बल्कि उन सभी चीज़ों को प्रभावित करती है जो उस क्षेत्र के अंदर आते हैं। इसलिए उन्हें लगता है कि उस जगह पर समय सामान्य गति से गुजर रहा है। लेकिन अगर वैज्ञानिक उन्हें देखते, तो वे अंतरिक्ष यात्रियों को बहुत धीमी गति से चलते हुए देखते, लगभग स्थिर खड़े हुए। एक छोटी सी क्रिया देखने की कल्पना करें, जैसे किसी वस्तु को गिराना, और वह लगभग 20 घंटे तक गिर रही है। और यदि अंतरिक्ष यात्री दूरबीन से अंतरिक्ष यान को देखते, तो वे कहते हैं कि केवल दो सेकंड में उन्हें 20 घंटे चलना पड़ेगा।

सवाल यह आता है कि उनमें से कौन सा सही है ? और हम कहेंगे दोनों। प्रत्येक अपने स्थान के आधार पर अपना सच देख रहा है। वे गुरुत्वाकर्षण से अलग-अलग प्रभावित स्थानों में हैं। अंतरिक्ष यात्री वैज्ञानिक के मुक़ाबले अधिक प्रभावित होते हैं। मिशन के अंत में, अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष यान में लौटते हैं और तब उन्हें पता चलता है कि वैज्ञानिकों की उम्र बहुत बढ़ चुकी है। खैर उन्होंने ग्रह पर तीन घंटे बिताए, अंतरिक्ष यान में व्यक्ति के लिए 23 साल गुजर गए। और इस तरह से वे समय के माध्यम से यात्रा करते हैं।

यह सिक्के की तरह है। एक तरफ गुरुत्वाकर्षण, दूसरी तरफ गति। लेकिन मुझे ऐसा लगता है की गति को दूसरा सिक्का होने की ज़रूरत है. कैसे? स्पष्टीकरण को आसान बनाने के लिए, चलिए आइंस्टाइन की प्रसिद्ध ट्रेन का उदाहरण लेते हैं. लेकिन इसका मतलब यह है कि आइंस्टाइन किसी ज़माने में कंडक्टर भी हुआ करते थे.

एक चलती हुई ट्रेन है. इसके अंदर, वैगन के फर्श पर एक टॉर्च है जो कि प्रकाश की किरण चमका रही है। प्रकाश छत पर एक दर्पण को हिट करता है और टॉर्च पर लौटता है। यदि आप ट्रेन के अंदर थे, तो आपने ट्रेन की गति पर ध्यान दिए बिना प्रकाश को हमेशा की तरह ऊपर-नीचे होते देखा था। क्योंकि आपके दृष्टिकोण से, ऐसा लगता है जैसे वैगन के अंदर सब कुछ नहीं चल रहा था। अब मान लीजिए कि आप किसी स्टेशन खड़े हुए ट्रेन की प्रतीक्षा कर रहे हैं, और वही ट्रेन आपके सामने से गुज़रती है। अब क्यों की ट्रेन सामने से तेज गति से जा रही है, आप प्रकाश को थोड़ा अलग रास्ता बनाते हुए देखेंगे। यदि ट्रेन की रफ़्तार प्रकाश की बीम की रफ़्तार के आस पास है तो प्रकाश के मार्ग में यह अंतर और भी अधिक ध्यान देने योग्य होगा। उस स्थिति में, आप बीम को इस रास्ते पर जाते हुए देखेंगे। और यह पता लगाना आसान होगा कि कौन सा रास्ता लंबा है। और इस तरह से यह साबित होता है कि समय और गति आपस में जुड़े हुए हैं।

ट्रेन के बाहर लोग प्रकाश को एक लंबा रास्ता लेते हुए देखते हैं। यदि यह अधिक दूरी तय करता है, तो ऐसा करने में भी अधिक समय लगता है। ऐसा ट्रेनों की गति के कारण हुआ जिसने समय को विकृत किया (Time Distortion)। गति जितनी अधिक होगी, विकृति (time Distortion) भी उतनी ही अधिक होगी। इसलिए यह हमारे सिक्के का दूसरा पहलू है। लेकिन अगर आप को गति का प्रभाव महसूस करना है तो इसके लिए आपको और तेज जाना पड़ेगा. उसैन बोल्ट की तरह। और तेज. यह गति इतनी हो सकती है जितने की है हमारे उदाहरण में उस ट्रेन की थी. यह प्रकाश की गति जितनी तेज़ है, और प्रकाश से तेज़ ब्रह्माण्ड में कुछ भी नहीं है. प्रकाश लगभग 300,000 किमी / सेकंड की गति से चलता है।

299, 792 किमी/s।

तो आइए देखते हैं कि ब्राज़ील और बीजिंग जो चीन में है इनके बीच का फ़ासला 17000 किलोमीटर है. और अगर हम प्रकाश की बात करें तो एक सेकेंड में प्रकाश इस फ़ासले को नौ बार बार कर सकता है. हमारे लिए यह दूरी काफ़ी बड़ी हो सकती है लेकिन ब्रह्माण्ड के लिए छोटी है. ग्रहों और तारों के बीच की दूरी इतनी बड़ी है कि वैज्ञानिक ने प्रकाश वर्ष की अवधारणा को बनाया, जिससे की बहन डिग्री भी जा सके जो प्रकाश एक साल में कवर करता है और यह लगभग 10 ट्रिलियन किलोमीटर है. तो एक तारे से प्रकाश जो 10 प्रकाश वर्ष दूर है, हमें पहुँचने में 10 वर्ष लगते हैं। समय की यात्रा के प्रभावों को महसूस करने के लिए आपको इस तरह की गति से दौड़ना होगा। लेकिन आपको एक बात का ध्यान रखना होगा कि जितना देस आप भागेंगे उतना ही धीमा समय हो जाएगा.

ओह, तो ऐसा ही उस आदमी के साथ हुआ, जिसने भविष्य की पूरी यात्रा की थी? दरअसल, रूडोल्फ फेंटेज़ कभी अस्तित्व में नहीं था। वह कहानी का एक पात्र है जो इतना लोकप्रिय था, यह एक शहरी किंवदंती बन गया। लेकिन लोगों को एहसास नहीं है कि कहानी के पीछे की अवधारणा वैज्ञानिक रूप से संभव है। और, इसलिए मैं यह कह सकता हूँ कि पृथ्वी पर समय के यात्री, यानी टाइम-ट्रेवलर अस्तित्व में है। लेकिन उनको खोजना थोड़ा कठिन है। यह लैटिन अमेरिका में सबसे बड़ा कण त्वरक यानी particle accelarator SIRIUS है, जिसे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनाया गया है। SIRIUS में, इलेक्ट्रॉनों को प्रकाश के निकट गति के लिए त्वरित (accelarate) किया जाता है, और electrons वहां रहते हैं, वैक्यूम पर चल रहे होते हैं, और यह प्रक्रिया घंटों तक चलती है। इस प्रक्रिया का लक्ष्य एक विशेष प्रकार की रोशनी का उत्पादन करना है, जिसका उपयोग दुनिया भर के विभिन्न प्रयोगों में वैज्ञानिकों द्वारा किया जाता है। इस कण त्वरक ( particle accelerator ) में, इलेक्ट्रॉन प्रकाश की गति का 99.999998% है। इसलिए, वे लगभग 600,000 बार प्रति सेकंड इस मशीन के चारों ओर घूमते हैं जो 500 मीटर की परिधि में है। लेकिन निकट प्रकाश की गति से यात्रा करने से इलेक्ट्रॉनों को अलग तरह से अंतरिक्ष का अनुभव होता है।

कल्पना कीजिए कि आप उस गति से यात्रा कर सकते हैं। दूरियाँ जो आपको लंबी लग सकती हैं, वह छोटी हो जाएंगी। यही इलेक्ट्रॉनों के लिए भी हो रहा है। उनके लिए, इस विशाल त्वरक ( accelarator ) में केवल 9 सेमी की परिधि है। एक अंगूठी के समान। लेकिन यह सिर्फ दूरी नहीं है जो उस गति के तहत कम हो जाती है। समय भी धीमा हो जाता है। प्रकाश की गति के निकट, इन इलेक्ट्रॉनों को लगता है कि समय हमारी तुलना में 6000 गुना धीमा है। इसलिए यदि आप इस त्वरक ( accelarator ) में प्रवेश करते हैं, तो आप पाएंगे कि समय अलग तरह से गुजर रहा है। यह ऐसा होगा जैसे आप समय के साथ यात्रा कर रहे हों। इलेक्ट्रॉन की गति से जाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए, समय उससे बाहर के 6000 गुना कम हो जाता है। दूसरे शब्दों में, इस गति से एक सेकंड की यात्रा करके, यदि आप उस घड़ी को देखते हैं जो यहाँ पर रुकी है, तो आप देखेंगे कि आपने भविष्य में एक घंटा 40 मिनट की यात्रा की है।

वास्तव में, यह साबित करता है कि हम किसी वस्तु में तेजी लाकर समय के फैलाव (Time Dilation) का निरीक्षण कर सकते हैं।

लेकिन शायद नहीं, हम अपने पैमाने को कैसे व्यापक करेंगे? कल्पना कीजिए कि हम भविष्य में हैं, और अंतरिक्ष अन्वेषक को किसी अन्य तारे की यात्रा करने और फिर पृथ्वी पर लौटने का एक मिशन सौंपा गया है, इसके लिए वे आकाशगंगा में सबसे तेज़ जहाज का उपयोग करते हैं, जो आधी प्रकाश गति तक पहुँचने में सक्षम है। इसका गंतव्य Proxima Centauri है, जो सूर्य के सबसे निकट का तारा है, जो इससे लगभग चार प्रकाश वर्ष दूर है। इस यात्रा को पूरा करने में उन्हें कितना समय लगेगा? वैसे यह प्रेक्षक (observer) पर निर्भर करता है। पृथ्वी पर लोगों के लिए, जहाज पर जाने के लिए जहाज को लगभग 8.5 वर्ष और लौटने में 8.5 वर्ष लगेंगे। इसलिए, यात्रा में 17 घंटे लगेंगे। हालांकि, हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि गति जितनी अधिक होती है, उतनी धीमी गति होती है। खोजकर्ता के लिए, एक ही यात्रा में लगभग 14.5 साल लगेंगे, क्योंकि जब वे अत्यधिक गति से यात्रा कर रहे होते हैं, तो उनके लिए समय अलग-अलग होता है।

पृथ्वी पर लौटने पर, खोजकर्ताओं ने नोटिस किया कि उन्होंने भविष्य में दो वर्षों में थोड़ी यात्रा की है। लेकिन वे दो साल नहीं गुज़रे थे। वास्तव में, वे खिंचे हुए थे। इस तरह उन्होंने समय के माध्यम से यात्रा की। लेकिन क्या हम अतीत में भी यात्रा कर सकते हैं? यह काल्पनिक रूप से असंभव है. हम जानते हैं कि शरीर जितनी तेज गति से यात्रा करेगा उतनी ही धीमी गति से चलेगा. सैद्धांतिक रूप से यदि शरीर प्रकाश की गति तक पहुँच जाता है तो एक तरह से वह रुक जाएगा. और इसलिए अगर आप प्रकाश की गति तक पहुँचने के बाद रुक जाते हैं, उस समय को पीछे की ओर ले जाने के लिए औसत गति को और भी बढ़ाना होगा. किन सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार प्रकाश की गति सबसे बड़ी गति है और अतीत में वापस जाना संभव नहीं है। लेकिन हो सकता है कि वर्महोल का उपयोग करके अतीत की यात्रा करने का एक अलग तरीका हो।

वैज्ञानिक मानते हैं कि एक सुरंग हो सकती है जिसे वे वर्महोल कहते हैं जो ब्रह्मांड में दो बिंदुओं को जोड़ता है। सही परिस्थितियों में, यह एक समय सुरंग के रूप में काम कर सकता है। जिसका एक छेद वर्तमान में खुलता हो और दूसरा अतीत में। एक व्यक्ति एक से दूसरे होल में जा सकता है और समय में वापस जा सकता है। लेकिन यह एक परिकल्पना है।

मुझे पता है कि समय यात्रा के बारे में बात करना मुश्किल है क्योंकि हम किताबों, फिल्मों और टीवी शो से प्रभावित हैं, इसलिए यह देखना मुश्किल है कि यह विचार विज्ञान के अनुसार संभव है। हालाँकि इन सभी काल्पनिक कहानियाँ को पीछे छोड़कर छोड़कर एक तरफ यात्रा करें और केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित करें कि विज्ञान हमें इस बारे में क्या बताता है, हम देखते हैं कि यह अवधारणा जितनी काल्पनिक हो सकती है, उतनी है पूरी तरह से संभव है। हम इसे जानते हैं, Karl Schwarzschild, Hendrick Lawrence, Roy Kerr, Albert Einstein जैसे वैज्ञानिकों की प्रतिभा की बदौलत और कई अन्य लोगों ने अपने सिद्धांतों से एक नई दुनिया के द्वार खोले हैं। कई सिद्धांत इतने उन्नत है कि वे अब सिद्ध हो रहे हैं।

अप्रैल 2019 में, हमें एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक सफलता मिली, जब एक ब्लैक होल की पहली वास्तविक तस्वीर मिली। विज्ञान ने अत्यधिक सटीकता के साथ भविष्यवाणी की कि एक ब्रह्मांडीय घटना को घटने में पूरी सदी से ज़्यादा का समय लग गया, जिस पर अब आगे काम किया जा सकता था। इन सभी वैज्ञानिकों ने न सिर्फ़ पहले से चले आ रहे काम करने के तरीक़ों को बदला बल्कि जिस तरह से हमने वास्तविकता का अनुभव किया, उसका विस्तार भी किया। उसके लिए हमें इनको धन्यवाद करना चाहिए. हम अब न केवल समझते हैं, बल्कि यह भी साबित कर चुके हैं कि समय के साथ यात्रा करना संभव है।

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