डायनासौर को मारने वाली चट्टान सौर मंडल के किनारे से आई थी

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अंतरिक्ष की चट्टान का बड़ा हिस्सा जिसने धरती पर रहने वाले डायनासोरों को मार दिया वह उस धूमकेतु का बड़ा टुकड़ा हो सकता है जिससे बृहस्पति ग्रह के गुरुत्वाकर्षण ने बाहर फेंक दिया था. एक नए अध्ययन से पता चला है कि डायनासोर की हत्या करने वाला धूमकेतु का टुकड़ा बृहस्पति और मंगल के बीच से आया हुआ क्षुद्रग्रह नहीं था, जैसा कि अक्सर कहा जाता है. इसके बजाय,अध्ययन लेखकों का तर्क है, कि यह ऊर्ट बादलों (Oort Cloud) से निकला हुआ एक धूमकेतु का टुकड़ा था, यह बादल बर्फ़ीले पिंडों का एक द्रव्यमान है जो सौर मंडल के बाहरी किनारों को घेरते है. 


इन बादलों के धूमकेतुओं को सूर्य के चारों ओर एक और गहरा बनाने में सैकड़ों साल लगते हैं, और पिछले अध्ययनों ने यह साबित किया था कि किसी ग्रह के पथ को पार करने की उनकी संभावना बहुत कम है, जिससे यह नहीं कहा जा सकता कि इन धूमकेतुओं की वजह से डायनासोर विलुप्त हो गए थे. यह लगभग 67 मिलियन साल पहले की बात है. 


लेकिन हाल ही के शोध में पाया गया है कि बृहस्पति ग्रह का गुरुत्वाकर्षण इन धूमकेतुओं को शून्य के क़रीब धकेलता है जिससे कि वह अलग हो जाते हैं और इनका पृथ्वी से टकराने की संभावना 10 गुना अधिक बढ़ जाती है. 


क्रेटेशियस पीरियड नई जाते जाते मैक्सिको के वर्तमान शहर चिक्सकुलब के पास एक 93 मील व्यास में गड्ढा भी छोड़ा था. और जिसकी वजह से उस चट्टान का नाम चिक्सकुलब  के ऊपर रखा गया - Chicxulub impactor. चट्टान कम से कम छह मील चौड़ी थी और लगभग 44,640 मील प्रति घंटे की रफ्तार से इस ग्रह से टकराई थी।


Chicxulub impactor कहाँ से आया यह अभी तक एक बहस का विषय है,  गड्ढे के विश्लेषण के बाद भूवैज्ञानिक बताते हैं कि यह एक कार्बन से बना हुआ टुकड़ा था , जोकि एक प्रकार की उल्कापिंड था, जो सौर मंडल में मुख्य क्षुद्रग्रह बेल्ट के     बेहतर पाए जाने वाले 10% के द्रव्यमान को बनाता है. और बादलों की संरचना में इस तरह की संरचना होना संभव है.    


शोधकर्ताओं ने पिछले और बादलों के धूमकेतु, जिन्होंने  जूपिटर के रास्तों का अनुकरण किया था, उनके बारे में यह पाया गया कि सौर मंडल के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र की वजह से ये धूमकेतु सूरज की तरह गरम हो गए थे. सूरत गुरुत्वाकर्षण इस प्रकार के धूमकेतु को अपने निकट खींचता है जिससे ज्वारीय बलों (Tidal forces) का निर्माण होता है. 


इस तरह के टुकड़े जब और तबादलों की तरह वापस जाते हैं तो पृथ्वी के साथ उनके टकराव होने की अधिक संभावना है, लेकिन, ऐसा 250-750 लाख सालों में एक बार होता है. हार्वर्ड विश्वविद्यालय के एक खगोलविद एवि लोएब ने कहा, "हमारा पेपर इस घटना की घटना को समझाने के लिए एक आधार प्रदान करता है।” उन्होंने बताया कि अगर सूर्य के क़रीब आने वाले किसी वस्तु को तोड़ा जाता है तो वैसा ही प्रभाव वापस पड़ सकता है जैसा डायनासोरों के मरने के वक़्त पड़ा था.


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