गोपनीयता: आने वाली पीढ़ी को कैसे बचाए

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1989 में वैज्ञानिकों ने अपने कार्यों के नोट्स साझा करने के लिए एक प्रणाली का उपयोग करना शुरू किया, इस प्रणाली को टिम बर्नर्स-ली नाम के एक 34 वर्षीय CERN वैज्ञानिक ने बनाया था, और इस आविष्कार ने सब कुछ बदल के रख दिया था. और आपने भी इस आविष्कार के बारे में सुना होगा इसका नाम था वर्ल्ड वाइड वेब (www). इस आविष्कार के तीन दशक  के बाद और 4.57 बिलियन उपयोगकर्ताओं के बाद, आज इसका आविष्कारक अपने आविष्कार को बचाने के लिए एक मिशन पर है. वह किसी भी तरह से इसे गोपनीयता की विभिन्न समस्याओं से बचाना चाहता है


कैम्ब्रिज एनालिटिका घोटाले के मद्देनजर - ​​जिसमें 87 मिलियन फेसबुक उपयोगकर्ताओं के डेटा को सहमति के बिना प्राप्त किया गया थाबर्नर्स-ली (अब प्रो सर टिम बर्नर्स-ली), ने कई अभियानों को सहायता दी है और सरकारों को काम करने के लिए प्रेरित किया है। इसमें विशेष रूप से नए वैश्विक वेब नियमों के लिए वेब कॉलिंग के लिए 2019 का अनुबंध शामिल है। लेकिन इसका काफ़ी सीमित प्रभाव पड़ेगा. हालांकि, बर्नर्स-ली हमारी ऑनलाइन दुनिया को एक तरह से उल्टा करने की कोशिश कर रहे हैं, जिसे वे कहते हैं कि ये एक सही तरीक़ा है जो वर्ल्ड वाइड वेब में ऊपर से शुरू होगा. उनके इस विचार का नाम है SOLID: इसके तहत वेब को विकेंद्रीकृत (centralized) करने के उद्देश्य से एक नई प्रणाली का निर्माण करना है. अगर इसके मूल में जाएं तो यह एक ऐसा प्लेटफ़ॉर्म है जिससे आप अपनी निजी जानकारी को व्यक्तिगत ऑनलाइन डेटा स्टोर (PODS) में संग्रहीत कर सकते हैं, और जिसका नियंत्रण पूरी तरह से आपके पास है. हालांकि अधिकांश साइटें और ऐप्स वर्तमान में आपका डेटा लेती हैं और इसे आपकी पहुंच से बाहर वे इसे अपने सर्वर में ले जाती है. लेकिन PODS के उपयोग से दूसरी वेबसाइट आपका डेटा हमेशा PODS से निकालेगी, इसके लिए आपकी अनुमति की आवश्यकता होगी. संक्षेप में वह केवल आप ही होंगे जो अपने डेटा पर पूर्ण नियंत्रण रख पाएंगे. वर्तमान में यह प्रणाली अपने प्रायोगिक चरण में है जिस पर NHS, BBC, NatWest और बेल्जियम सरकार अपने-अपने प्रयोग कर रही है


लेकिन क्या यह वास्तव में अकेले इंटरनेट की गोपनीयता की समस्या को ठीक कर सकता है? हमने इन सवालों को टिम बर्नर्स-ली के समक्ष रखा। 


ऑनलाइन गोपनीयता क्यों उपयोगी है?  


ऑनलाइन गोपनीयता की कमी केवल आपके डेटा का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों के बारे में नहीं है, लेकिन वे इसका उपयोग कैसे करते हैं, वहाँ भी है. और गोपनीयता की सुरक्षा करना तब और ज़रूरी हो जाता है जब कंपनी यह भी देख रही है कि आप कहाँ पर क्लिक कर रहे हैवे इस गोपनीयता की कमी का उपयोग आपको उस सामान पर क्लिक करवाने के लिए कर रहे हैं, जिस पर आपको क्लिक नहीं करना चाहिए। बिना आपकी अनुमति की आपकी निजी जानकारी का उपयोग करते हुए, उन्होंने आपकी एक प्रोफ़ाइल बनाई है और वास्तव में वे जानते हैं कि आप कौन हैं। वे राजनीतिक, वाणिज्यिक या फिर आपराधिक चीज़ों के लिए आपसे झूठ बोल सकते हैं , उनको यह भी पता है कि आप की रुचि किस विषय में ज़्यादा है. और इसी का अगर बड़ा उदाहरण लें तो उसकी तस्वीर काफ़ी बड़ी है, वे आपके बारे में डेटा का दुरुपयोग करके अन्य व्यक्तियों को उन लोगों को वोट देने के लिए कर सकते हैं जो उन्हें वास्तव में नहीं चाहिए - ये वे लोग हो सकते हैं जो सर्वोत्तम हित में कार्य नहीं करते हैं।


10 साल पहले तक यह कहा जाता था कि मानवता वेब  का उपयोग करती है और यदि हम मानवता को देखेंगे तो हम अच्छे और बुरे दोनों तरह के लोग पाएंगे. टिम कहते हैं कि हालाँकि 2016 के आस पास जबफ़ेसबुक कैंब्रिज एनालिटिकल स्कैंडलहुआ था, तब मुझे इस बात का एहसास हुआ कि ऐसे बहुत से लोग हैं जिनको मैं जानता हूँ और मुझे यह पता है कि वे किस तरह की जानकारियां वेब पर पड़ रहे हैं वे लोग विश्वसनीय है. लेकिन ऐसे भी बहुत से लोग हैं जिनको मैं नहीं जानता हूँ और वे वेब पर कुछ भी पढ़ रहे हैं जिसके बारे में मुझे नहीं पता. लेकिन इस स्कैंडल के बाद, मैं यह उम्मीद करता हूँ कि वे सारे लोग जो समझदार है वे सोशल नेटवर्क पर अपनी ज़िम्मेदारी और कर्तव्य निभाएंगे

 

अमरीका में अरबों लोगों ने अपनी निजी जानकारियां बड़ी तकनीकी कंपनियों के हवाले की हुई है. क्या इसका मतलब यह नहीं है कि अपने दिन-प्रतिदिन के जीवन में अधिकांश लोग अपनी गोपनीयता के बारे में चिंता नहीं कर रहे हैं, वह भी तब जबकैम्ब्रिज एनालिटिकाजैसी घटनाएँ हो जाती है. इस तरह की घटनाओं के बाद लोग चिंतित हो सकते हैं कि वे एक ऐसी प्रणाली का हिस्सा है जिस प्रणाली ने चुनाव में हेर-फेर भी किया था. आपने यह देखा होगा कि जैसे ही इस तरह की घटना होती  हैं, वैसे ही लोगों के झुंड के झुंड ऐसे नेटवर्क को छोड़ने की शुरुआत कर देते हैं और तब वे अपना डेटा कहीं और स्थानांतरित करने की कोशिश करते हैं, लेकिन तब भी उन को यह नहीं पता होता कि ये जहाँ वे अपना डेटा स्थानांतरित कर रहे हैं वह सर्वर भी सुरक्षित है या नहीं


यह काफ़ी आश्चर्यजनक है लेकिन सच है कि चीज़ें कितनी जल्दी बदल सकती है. सालों पहले लोग चिंतित थे कि Netscape पर Internet Explorer हावी था. धीरे धीरे इसने Netscape Navigator का नामो निशान मिटा दिया था. और आज सब यही कहते हैं कि चाहे कैसा भी ब्राउज़र हो, जानकारियां खोजने के लिए लोग एक ही इंजन का उपयोग कर रहे हैं, और इस तरह से आपकी डेटा की सुरक्षा ब्राउज़र की हाथों में नहीं रह जाती है . ख़ैर समस्याओं के हल तो हमेशा से ही खोजे जाते रहे हैं लेकिन प्रमुख बात हमेशा नवीनता और रचनात्मकता की ही रही है।


ऐसा लग रहा है कि SOLID एक नए तरीक़े का वर्ल्ड वाइड वेब का निर्माण कर रहा है?

हाँ! यह वास्तव में रोमांचक है क्योंकि यह एक नई प्रणाली का निर्माण कर रहा है। लेकिन यह उस वेब के समान है जिसमें यह स्पष्ट करना कठिन है कि एक विकेंद्रीकृत प्रणाली वाली दुनिया होगी जो सॉलिड जैसी दिखेगी। उदाहरण के तौर पर आप किसी भी ऐप से वीडियो कॉल अपने किसी भी मित्र को कर सकते हैं, ऐसा करने के लिए आपको अलग अलग ऐप पर अपनी जानकारियां देने की कोई आवश्यकता नहीं होगी. और यदि आपने कोई वेबसाइट बनायी है तो आपको ग्राहक का डेटा स्टोर करने के लिए अलग से डेटाबेस नहीं बनाना होगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि PODS एक मानकीकृत संरक्षित डेटा सेट प्रदान करेगा।


क्या सॉलिड (SOLID) अकेले इंटरनेट की समस्याओं का समाधान कर सकता है ?

जब हम गोपनीयता की समस्या की बात करते हैं तो सरकार और कंपनियों को इस विषय में कार्य करने की ज़रूरत होती है. उदाहरण के लिए GDPR [यूरोपीय संघ का सामान्य डेटा संरक्षण विनियमन जो डेटा संगठनों को उपयोगकर्ताओं से ले सकता है] सॉलिड (SOLID) के साथ जुड़ा हुआ है


SOLID केवल आपको अपना डेटा नियंत्रण करने की अनुमति देगा बल्कि आप किसी भी समय पर उस डेटा का एक्सेस बंद भी कर सकते हैं. आप के अलावा कोई भी आपका डेटा ना तो बदल पाएगा देख पाएगा और ना ही मिटा पाएगा. क्योंकि एक उपयोगकर्ता के रूप में अगर आप अपना एक्सेस बंद करते हैं या फिर आप अपना डेटा मिटाते हैं तो इसके लिए भी आपको कुछ नियम और कानूनों का पालन करना होगा




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