स्वस्तिक और नाज़ी के चिन्ह

बहुत बार इन दोनों चिन्हो के देखने से ऐसा लगता है जैसे ये दोनों एक ही है, लेकिन यह दोनों अलग है | अगर आप ध्यान से देखे तो आपको पता चलेगा की दोनों चिन्ह अलग दिशा में खड़े है | लेकिन सबसे बड़ा सवाल है की आखिर क्यों यह दोनों चिन्ह एक सामान है ? स्वस्तिक का निशान हिन्दू धर्म में एक बहुत बड़ा निशान माना जाता है, हर शुभ अवसर पर इसे लोग इस्तेमाल करते है, कभी पूजा की थाली पर, कभी दरवाजे के बाहर | और जब इस निशान को नाज़िओ ने इस्तेमाल किया तब उन्होंने लाखो लोगो का खून किया और बहुत तबाही मचाई , तो देखा जाये तो चिन्ह एक से है लेकिन इनको इस्तेमाल करने का तरीका अलग हो गया |

उन्नीसवीं सदी की शुरुआत में स्वस्तिक को बहुत ही शुद्ध निशान माना जाता था, यह हर पूजा और शुभ काम में इस्तेमाल किया जाता था | ऐसे भी उदहारण है जिनसे ये पता चलता है की की पश्चिम समाज भी इस निशान को इस्तेमाल करने लग गया था |

अमेरिका के स्टीवन हेल्लेर के अनुसार , "कोका कोला ने इसे इस्तेमाल किया | कार्ल्सबर्ग ने अपनी बियर की बोतलों पर इसे लगाया | एक अमरीकी मैगज़ीन का नाम स्वस्तिक था | "

इसे अमरीका की सेना ने भी इस्तेमाल किया और अपने लड़ाकू विमानों पर भी इसे लगाया |
जब जर्मनी ने भारतीय वेदो को समझना चालू किया तब उन्हें पता चला की जर्मन और संस्कृत भाषा में बहुत समानताये है और कुछ समानताये दोनों देशो की संस्कृति के बीच भी है | जर्मनी को लगने लगा की हम बहुत हद तक एक ही वंश के है और शायद हम सब आर्यन्स के वंश के है |

यहूदिओं के लिए स्वस्तिक का मतलब डर है |

सच्चाई तो यह है की स्वस्तिक एक बहुत ही पुराना निशान है, इतना पुराना की हम सोच भी नहीं सकते, और अगर हम सोचे की स्वस्तिक और भारत एक है तो ऐसा मानना हमारी गलती होगी | स्वस्तिक यूरोप के देशो की पुरानी किताबो में , उनकी पुरानी इमारतों में मिला है, ग्रीक सभ्यता ने भी इसे इस्तेमाल किया है | वे लोग अपने सामानो पर स्वस्तिक इस्तेमाल करते थे |

लेकिन अभी भी हमारा सवाल है की नाज़िओ ने स्वस्तिक को ही क्यों चुना ?
इतना तो हमें पता है की स्वस्तिक का इतिहास बहुत पुराना है , यह इतना पुराना की हमारी सबसे पुरानी सभ्यताओं ने भी इसे इस्तेमाल किया था और तो और यूरोप के देशो खासकर जर्मनी ने इस पर काफी शोध किया और इसे एक शुभ संकेतक चिन्ह माना |

हिटलर ने खुद अपनी एक किताब में कहा था की "यह हमारे संघर्ष का निशान है" |

नाज़िओ ने आधिकारिक तौर पे सफ़ेद गोले के साथ लाल झंडा और स्वस्तिक चिन्ह को 1920 में अपनाया था |

हिटलर ने कहा था , " ये झंडा हमारे पार्टी का प्रतिनिधित्व करेगा| लाल रंग का मतलब हमारा समाज के प्रति दायित्व, सफ़ेद का मतलब हमारे देश के प्रति दायित्व और स्वस्तिक का मतलब हमारा मिशन जिसे हमें जीतना है | "

जर्मनी की वजस से इस स्वस्तिक के निशान के अंदर लाखो इंसानो को मारा गया , सेना की वर्दी पे स्वस्तिक का निशान लगा होता था और उनका बस एक ही काम होता था की हिटलर की बात को मानना , हिटलर के बाद लोगो को इस निशान से एक नफरत से हो गयी थी|

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